Monday, 13 August 2012

''टूटता भारत''


भारत टूटता रहा ,हम देखते रहे
देशप्रेम की सौगंध खाते रहे, 
पर देश प्रेम को हम भूलते रहे
टुकड़ो में बंटती भूमि को अपनाते रहे ,
वन्दे मातरम कहते रहे ,वन्दे मातरम भूलते रहे .......... 
वे कश्मीर के स्वर्ग को नरक बनाते रहे ,
हम कहते रहे कश्मीर हमारा है ,
और कश्मीरियों को भगते कटते देखते रहे .........
हिंदी चीनी भाई -भाई का नारा हम गाते रहे ,
और चीनी हमें चीनी की तरह खाते रहे,
और अकाई चीन को हम चीन में जाते देखते रहे, 
हम भारत में ''भारत ''को ही भूलते रहे ..............
कभी अहिंसा के नाम पर हम मरते रहे ,
कभी शांति के नाम पर हम पिटते रहे ,
कभी काफिर के नाम पर, हम मारे जाते रहे ,
कभी जाति के नाम पर, हम बांटे जाते रहे ,
कभी आरक्षण की वेदी पर हम जलते रहे ,
वे तोड़ते रहे हम टूटते रहे, हम बंटते रहे,
आज़ाद, भगत जैसे बलिदानियों की धरती को हम ,
गद्दार नेताओं को सौपते रहे ,वे नेता देश को बेचते रहे ,
हम भारत को बिकते देखते रहे ,
झूठी आज़ादी के गीत हम  गाते रहे, 
झूठे -भुलावे की आज़ादी में जीते रहे.........
भारत टूटता रहा ,हम देखते रहे
देशप्रेम की सौगंध खाते रहे, 
पर देश प्रेम को हम भूलते रहे|
भारत टूटता रहा ,हम देखते रहे....|

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